भीड़ बनना मुझे पसंद नहीं भीड़ बनकर मनमौजी करना पसंद नहीं मुझे पसंद नहीं चलती बस में आग लगा देना यह जाने बिना कि किसकी गलती से लगा है धक्का राहगीर को नहीं पसंद है मुझे मार-मार कर किसी को अधमरा कर देना नहीं है पसंद मुझे भीड़ बनकर टूट पड़ना ना समझे, ना जाने किसी पर आक्रोश निकालना मुझे नहीं पसंद है भीड़ बनकर तबाही मचाना भीड़ बनकर पथावरोध करना भीड़ बनकर किसी महिला को नग्न करना नग्न कर उस पर हमला करना नहीं है पसंद मुझे भीड़ बनकर बलात्कार पर बलात्कार करते रहना नहीं है पसंद मुझे भीड़ बनना भीड़ बनकर किसी भी रैली, समारोह के लिए निकल पड़ना भीड़ बनकर धक्का देना, धक्का देकर आगे बढ़ जाना भीड़ बनने से अच्छा है एकांत में खड़े रहना कोने में दुबके रहना अपने को भीड़ से बचाये रखना
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बस केवल कृष्ण की ही कमी है बाकी तो भरे ही पड़े है समाज में धृतराष्ट्र भी दिख पड़े उस दिन बिहार में उनके साथ जरूर ही रहे होंगे भीष्म पितामह और दुर्योधन तो था ही अपने रंग में बस केवल कृष्ण की ही कमी है बाकी तो भरे ही पड़े है समाज में दुस्सासन तो चारों ओर दिख रहा था जो भैया के कहने पर सड़कों पर दौड़ रहा था बस केवल कृष्ण की ही कमी है बाकी तो भरे पड़े है समाज में कहीं दूर शकुनि भी बैठे मुस्कुरा रहे होंगे और अपनी कामयाबी पर इतरा रहे होंगे वाह क्या बात है बीत गये युग, पर नहीं बिता यहाँ का रीत आज भी महिलाओं को नंगे कर उन पर हमले कर पुरुष अपनी मर्दानगी दिखाते हैं बस केवल कृष्ण की ही कमी है बाकी तो भरे ही पड़े है समाज में


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