Mannu bhandari
आज मन्नू भंडारी जी की कहानी स्त्री सुबोधिनी पढ़ी। वैसे यह कहानी पहले भी पढ़ी थी। जितनी बार पढ़ती हूँ, उतनी ही बार कुछ नया लगता है। सबसे बड़ी खास बात लगती है कि उनकी कहानी पात्रों के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। स्पष्ट तरीके से लिखती है। यह कहानी भी वैसी ही है। नाम से ही स्पष्ट है कि ज्ञान देने वाली स्त्री। यह एक चिट्ठी है, अपनी प्यारी बहनों के नाम। आज के समय में तो चिट्ठी का नामों निशान नहीं। इसलिए यह और भी ज्यादा प्रासंगिक है। इसके माध्यम से आज की लड़कियों को चिट्ठी का ज्ञान भी होगा। और सबसे बड़ी बात है कि लड़कियाँ जो कम उम्र की होती है, शादीशुदा आदमी से प्रेम कर बैठती है। शादीशुदा इंसान उसके भोले भाले मन का बहुत अच्छे से फायदा उठाता है। वह बहुत ही साधारण भाषा में स्कूल, कालेज में पढ़ने वाली लड़कियों को बताना चाहती है कि जब वह नौकरी में आयीं, तो उनको अपने ही बॉस शिंदे से प्रेम हो गया। पुरुष अपना घर, परिवार बचाते हुए ही बाहरी प्रेम कैसे जिंदा रखते हैं। वह अपनी मीठी-मीठी बातों से कम उम्र की लड़कियों का दिल ले लेते हैं और उनकी भावनाओं के साथ खेलते रहते हैं। शिंदे उम्मीद दिलाता रहता है कि वह सा...