मेरी माँ
पांच भाई - बहनों में छोटी होने के कारन मेरा और मेरी माँ के बिच एक अलग ही तरह का प्यार था आकर्षण था, जो हमेशा ही बना रहा। जब से मैंने दुनिया को देखना सिखा, चलना सिखा अपने पास केवल अपनी माँ को ही पाया। लगता था जैसे उनके पास मुझे हर ख़ुशी मिल जाती थी। सायद इसिलिय आज तक मेरी कोई दोस्त नहीं हे। क्योंकि सायद मुझे कभी किसी की जरुरत ही महसूस नहीं हुई। हम माँ बेटी से ज्यादा एक दुसरे के दोस्त थे। लेकिन जय आज जब मेरी माँ इस दुनिया को छोढ़ चली गयी हे तो में कितनी अकेली महसूस करती हु। आज मैं दो बेटियों की माँ हूँ। एक माँ होकर माँ को अच्छी तरह समझ पा रही हूँ। मैं चाहती हूँ कि जिस तरह मेरा और मेरी माँ का रिश्ता था, उसी तरह मेरा और मेरी बेटियों का रिश्ता रहें। लेकिन वह रिश्ता मजबूत होना चाहिए, कमजोर नहीं। मेरी बडी बेटी बहुत भावुक है। बिल्कुल मेरी तरह। और उससे भी ज्यादा भावुक और दिल से सोचने वाली। थोडा
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