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पिंक…पिंक…पिंक पूजा की छु्ट्टी में फिल्म पिंक देखी। पिंक यानी हल्का रंग, जिसे लड़कियों के लिए चिंहित कर दिया गया है। पिंक यानी गुलाबी रंग, यानी  गुलाब फूल का प्रिय रंग। बिल्कुल सही। जिस तरह प्राकृतिक ने गुलाब फूल के पेड़ में नाजुक फूल के साथ कांटे भरे हुए हैं, उसी तरह हम लड़कियों के जीवन में कुछ लड़के कांटे के रूप में आ जाते हैं। सबसे बड़ी बात है कि लड़कियाँ कितना हंसे, कितना मुस्कुराये, कितनी बातचीत करें, कैसा कपड़ा पहने, क्या खाये-क्या पीये इत्यादि…इत्यादि के लिए सीमाएं तय की गयी है, पर वे लड़के आजाद पक्षी की तरह आसमान में उड़ते हैं। इसके बाद लड़के लड़कियों को 24 X 7 घंटे उपलब्ध वाली सेवाएं समझते हैं, कि कभी भी उनके गंदे इशारों को समझ लें, उनके सामने पेश हो जाये। वह कभी भी लड़कियों को यूज एंड थ्रो कर सकते हैं। यह समस्या आजाद भारत के आजाद  नवयुवकों की ही वजह से है। उस पर अगर वह अमीर बाप का बेटा हुआ तो समझो पूरी दुनिया का ठेका उसी के पास है और वह इस दुनिया में कुछ भी कर सकता है। उसके लिए छेड़खानी, बलात्कार, धमकी देना जैसे आम बात है। इसी ताने-बाने को लेकर ही निर्देशक अनिरुद्ध राय चौधुर...
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मेरे छोटेबाबू

कुछ दिन पहले फादर्स डे मनाया गया। सबने ही अपने पिता को याद किया। मेरे पिता के भाई अर्थात् चाचा उर्फ छोटे बाबू की पुण्यतिथि आज है।   मेरे चाचा बिल्कुल सामान्य व्यक्ति थे। लंबा कद, मोटा शरीर और सांवला रंग। पर उनका व्यक्तित्व बहुत अच्छा था। वह सारी जिंदगी अपने भैया-भाभी के साथ गुजार दिये। वह कलयुग के लक्ष्मण थे। जहाँ एक तरफ पूरी ईमानदारी और मेहनत से पापा के मानव पत्रिका के कार्य में सहयोग निभाया करते थे, वहीं भाभी के एकमात्र देवर अपनी भाभी का हमेशा ख्याल रखा करते थे। भाभी अगर छठ पूजा का व्रत करती थी, तो देवर बड़ी श्रद्धा और लगन से छठ  पूजा का प्रसाद बनाने में साथ देते थे। जहाँ भाभी बीमार पड़ती, देवर उनकी सेवा के लिए तत्पर रहते। एक पल भी पीछे नहीं होते। वह कहते थे कि भाभी माँ बराबर होती है, तो उनकी सेवा करने में शर्म कैसी? वह हम पाँच भाई-बहनों को भी बहुत ज्यादा प्यार करते थे। बड़े भैया और भाभी को प्यार भी करते थे, पर उनके सामने डरते भी थे। फिर पीछे कहते कि मैं डरता नहीं, बच्चे बड़े हो गये इसलिए उसके सामने ज्यादा नहीं बोलता। मझले भाई का हमेशा ख्याल रखा। छोटे वाले भैया से उनका तू-तू-...

meri chhoti beti iti

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साक्षी एक नए रूप में

दस वर्ष पहले जहा बहु बनकर पारवती हमारे दिलो में छाई हुई थी वाही